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सामाजिक जिम्मेदारी

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अर्थपूर्ण अंतर बनाना

अर्थपूर्ण अंतर बनाना

एक मजबूत सामाजिक जिम्मेदारी की भावना आईआईएम उदयपुर के सभी कार्यकलापों को सूचित करती है। हम समाज को वापस देने, स्थानीय विकास में भूमिका निभाने और पर्यावरण सततता के सिद्धांतों को लागू करने में अग्रणी रहने के प्रति वचनबद्ध है।

ग्रामीण निमज्जन

पाठ्यचर्या में इसे पीजीपी के अनिवार्य ग्रामीण निमज्जन में दर्शाया जाता है। हमारा विश्वास है कि यह भविष्य के प्रबंधकों के लिए ग्रामीण भारत को समझने हेतु अनिवार्य है। ग्रामीण निमज्जन भारतीय सामाजिक एवं राजनीतिक वातावरण से संबंधित पाठ्यक्रम से आरंभ होता है और 5 व्यक्तियों की टीम में बांटी गई कक्षा से जारी रहता है जो कि गांव में एक सप्ताह व्यतीत करती है जहां वे जमीनी वास्तविकताओं को समझने और निचले स्तर पर रहने वाले व्यक्तियों के समझ आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए एनजीओ के साथ नजदीक से कार्य करते है। उनके अन्य पाठ्यक्रम में छात्र क्लास कार्य के भाग के रूप में क्षेत्र में कंपनियों/एनजीओ के साथ प्रतिवर्ष चालीस से पचास परियोजनाएं करते हैं।

छात्र परामर्श परियोजनाएं

छात्र अपनी अन्य बाह्य गतिविधियों में कक्षा से बाहर सामाजिक जिम्मेदारी में भी मजबूत योगदान देते है। कन्सल्ट यू, परामर्श क्लब क्षेत्रीय गैर-लाभकारी संगठनों के साथ प्रतिवर्ष लगभग छः प्रो बोनो परियोजनाएं चलाते है जिनमें निम्न शामिल हैः

  • साधना महिला सशक्तिकरण सहकारी (संजातीय परिधान निर्माता) के लिए विपणन अभियान तैयार करना।
  • सेवा मंदिर (उदयपुर-स्थित एनजीओ) के लिए एक सहकारी उत्पादक लेन्टिल में सहायता हेतु उत्पादन इष्टिकरण योजना तैयार करना।

प्रयत्न

प्रत्येक वर्ष लगभग 50 प्रतिशत छात्र प्रयत्न, सामाजिक जिम्मेदारी क्लब में भाग लेंगे जो सक्रिय स्वयं सेवा का संवर्धन करता है। हाल की परियोजनाओं में शामिल हैः

  • उड़ान – क्षेत्र में इंजीनियरिंग कॉलेजों में रिक्त सीटों की पहचान करता है और क्षमता के उपयोग के लिए वेतन के साधन के बगैर अर्हता प्राप्त छात्रों का उनसे मिलान करता है।
  • कैंपस कनेक्ट – लाभवंचित स्कूलों की हाई स्कूल छात्रों (~200-250) को परामर्श और कैरियर दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
  • स्वर – राजस्थान राज्य में ~150 नेत्रहीन छात्रों के लिए ऑडियों पुस्तकों में हिंदी-भाषा की पाठ्य-पुस्तकों को परिवर्तित करने की परियोजना।

कैरियर सहायता

उन छात्रों को प्रोत्साहित करने और उनकी सहायता करने जो सामाजिक क्षेत्र में कैरियर चुनने पर विचार कर रहे है, के लिए आईआईएमयू विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान करता हैः

  • स्टाइपंड अथवा उनकी ट्यूशन फीस पर छूट प्राप्त करने की संभावना
  • प्लेसमेंट अवकाश जो छात्रों को बाद में कैंपस प्लेसमेंट सेवा का उपयोग करने की अनुमति प्रदान करता है।

ग्रीन कैंपस

संस्थान के रूप में यह भविष्य के नेता तैयार कर रहा है, आईआईएमयू छात्रों को पारिस्थितिक सततता के सिद्धांतों को कैसे लागू करें, के संबंध में प्रयोगात्मक उदाहरण प्रदान करना चाहता है। अपने अस्थाई परिसर से आईआईएमयू का प्रयास इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम करना और इसकी ऊर्जा तथा संसाधनों को यथासंभव तरीके से सक्षमता के साथ उपयोग करना है। आईआईएमयू के नया परिसर ऊर्जा के रूप में आत्मनिर्भर होगा अर्थात् 8 वर्षों के भीतर यह नेट-जीरो परिसर होगा। अपशिष्ट का स्थल पर ट्रीटमेंट किया जाएगा और इसे पुनः उपयोग के संसाधनों के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। परिसर प्रौद्योगिकी उन्नति और जल संचय के पारंपरिक रूप दोनों का उपयोग करेगा। स्थायी परिसर

सीएसआर रैंकिंग परियोजना

आईआईएम, उदयपुर पहली सीएसआर परियोजना में गौरवशाली भागीदारी भी है। प्रोफेसर नीति सानन, आईआईएमयू की एक संकाय सदस्य ने नमृता राणा और उत्कृष्ट मजूमदार के साथ "क्या कारपोरेट भारत सीएसआर के लिए तैयार है॑?" संबंधी रिपोर्ट तैयार करने के लिए सहयोग किया है जो कि सीएसआर के साथ उनके कार्य के आधार पर भारत की सर्वोच्च कंपनियां है। इसमें लक्ष्य आने वाले वर्षों में कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रभाव का पता लगाने के लिए आवधिक रूप से इस शोध को अद्यतन बनाना है।

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