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सिहांवलोकन

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जैसा कि हमारे लक्ष्‍य विवरण में उल्‍लेख किया गया है, भारतीय प्रबंध संस्‍थान उदयपुर शिक्षण एवं शोध में दृढ़ता के साथ उत्‍कृष्‍ट शैक्षिक संस्‍कृति वाला संकाय द्वारा अभिशासित एक संस्‍थान है। हमारे अधिकांश स्‍थायी संकाय सदस्‍य भारत तथा विदेशों के प्रमुख विद्यालयों के हाल ही के डाक्‍टोरल स्‍नातक हैं जो उच्‍चतम गुणवत्‍ता की शोध की संभावना प्रदर्शित करते हैं कुछ मामलों में हम स्‍थायी संकाय सदस्‍यों के रूप में अति अनुभवी शिक्षाविदों को भी शामिल करेंगे।

भारतीय प्रबंध संस्‍थान उदयपुर एक ऐसा वातावरण प्रदान करता है जो यह सुनिश्‍चित करता है कि संकाय सदस्‍य शिक्षण एवं शोध अपने कौशल में वृद्धि और विकास कर सकते हैं। सैद्धांतिक छात्रवृत्‍ति जो प्रश्‍नों के क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण होगी और साथ ही प्रैक्‍टिसनरों, नीति- निर्माताओं, गैर-सरकारी संगठनों और अन्‍य उपभोक्‍ताओं के लिए संगत और उपयोगी शोध को शामिल करते हुए अनुसंधान को प्रोत्‍साहित करने के लिए कई समर्थनकारी पहल की गई हैं।

वर्तमान में आईआईएम उदयपुर में 31 पूर्णकालीन संकाय सदस्‍य हैं जिनमें से प्रत्‍येक ने पीएच.डी प्राप्‍त कर ली है अथवा वह भारत, यूरोप और उत्‍तरी अमेरिका में सर्वोत्‍तम स्‍कूलों के फैलो हैं। जैसे कि छात्रों की संख्‍या में अगले 5 वर्षों में वृद्धि होगी इसके साथ ही पूर्णकालीन संकाय सदस्‍यों की संख्‍या भी 2020 तक बढ़कर लगभग 60 हो जाएगी इसके अतिरिक्‍त आईआईएम उदयपुर आईआईएम और भारत तथा विदेशों से अन्‍य प्रख्‍यात बिजनेस स्‍कूलों से संबद्ध एवं विजिटिंग संकाय को आकर्षित करता है जिससे यह सुनिश्‍चित होता है कि छात्रों द्वारा प्राप्‍त किए जाने वाले शिक्षण की गुणवत्‍ता उच्‍चतम स्‍तर की है। प्रमुख कंपनियों के सर्वोचच एक्‍जीक्‍यूटिव को भी विजिटिंग संकाय के रूप में आमंत्रित किया जाता है जिससे शिक्षण कक्ष में गहन औद्योगिक अनुभव प्राप्‍त होता है।

हमारे पूर्णकालीन संकाय सदस्‍य शोध एवं शिक्षण में सम्‍मानित शाख वाले संबद्ध संकाय सदस्‍यों द्वारा प्रदत्‍त विशेषज्ञता और परामर्श से लाभन्‍वित होते हैं। नए संकाय सदस्‍यों से शिक्षण कार्य तत्‍काल स्‍वतंत्र रूप से आरंभ करने की आशा नहीं की जाती है। पहले वे कैम्‍पस में पढ़ाते हैं, वे सामान्‍यत: किसी मौजूदा संकाय सदस्‍य के साथ सह-अनुदेशक के रूप में कार्य करते हैं।

प्रशासन में संकाय सदस्‍यों की भूमिका सीमित है। भारत में कई बी-स्‍कूलों में ढांचे से अलग आईआईएम उदयपुर में कार्यक्रम प्रबंधन, प्रवेश तथा प्‍लेसमेंट जैसे कार्यों के लिए प्रशासनिक भूमिकाओं का कार्य संकाय सदस्‍यों के पर्यवेक्षण में प्राथमिक रूप से व्‍यावसायिकों द्वारा देखा जाता है। इससे संकाय सदस्‍य शिक्षण एवं शोध की उनकी प्रमुख जिम्‍मेदारियों पर ध्‍यान केंद्रित करने के लिए स्‍वतंत्र रहते हैं। पूर्णकालीन संकाय सदस्‍य अपना 50 प्रतिशत समय शोध पर, 45 प्रतिशत समय शिक्षण (मुख्‍य पाठ्यक्रम एवं इलेक्‍टिव दोनों) पर और बाकी 5 प्रतिशत समय सेवा से संबंधित विभिन्‍न कार्यकलापों पर व्‍यतीत करते हैं।

कैरियर विकास योजना

जैसे कि उल्‍लेख किया गया है आईआईएम उदयपुर के अधिकांश पूर्णकालीन संकाय सदस्‍य हाल ही में डाक्‍टोरल युवा स्‍नातक हैं जो अपने शैक्षिक एवं शोध कैरियर के शुरूआती चरण में हैं। इसलिए हमने 3 चरण की कैरियर विकास योजना तैयार की है जो उनके सम्‍मानित शोधकर्ताओं के रूप में उन्‍नति के साथ एक ढांचे के रूप में काम करती है:

चरण एक
  • परामर्श एवं सहयोग के माध्‍यम से शोध तथा शिक्षण उत्‍कृष्‍टता पर ध्‍यान केंद्रित करना।
  • उनकी सैद्धांतिक विशेषज्ञता का विकास करना।
  • प्रमुख संमीक्षा शैक्षिक जर्नलों में प्रकाशन।
चरण दो
  • डाक्‍टोरल छात्रों के माध्‍यम से शोध उत्‍पादकता का विस्‍तार करना और प्रयोग विशेषज्ञता का विकास करना।
  • परामर्श के मध्‍यम स्‍तर
  • प्रैक्‍टिसनर उन्‍मुखी जर्नलों को शामिल करने के लिए प्रकाशनों का विस्‍तार करना।
चरण तीन
  • परामर्श में विस्‍तार करने के लिए प्रयोग विशेषज्ञता का लाभ उठाना
  • युवा संकाय सदस्‍यों को अधिक परामर्श प्रदान करना।
  • सर्वोच्‍च जर्नलों, प्रैक्‍टिसनर उन्‍मुखी जर्नलों और पुस्‍तकों में अधिक प्रकाशन करना।

आईआईएम उदयपुर कड़ी चयन प्रक्रिया के साथ संकाय विकास के जापानी मॉडल का अनुसरण करता है परंतु एक बार संकाय की नियुक्‍ति होने पर वे इस उद्देश्‍य के साथ गहन संस्‍थागत सहायता से लाभान्‍वित होते हैं कि उनमें से प्रत्‍येक उसके द्वारा चुने गए क्षेत्र में स्‍थापित हो जाएगा। आईआईएम उदयपुर संकाय सदस्‍यों के लिए पारंपरिक मार्ग का अनुसरण नहीं करता है और यह संस्‍थान को प्रत्‍येक संकाय सदस्‍य की विशिष्‍ट परिस्‍थितियों, उनके शिक्षण की प्रकृति एवं उनकी शोध वरीयताओं पर ध्‍यान देने की अनुमति प्रदान करता है।