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शोध में सुविचारित नेतृत्‍व

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शोध में सुविचारित नेतृत्‍व

आईआईएम उदयपुर का उद्देश्‍य स्‍वयं को भारत में प्रबंधन शोध में अग्रणी के रूप में स्‍थापित करना है। इसे प्राप्‍त करने के लिए निम्‍नलिखित के संबंध में एक व्‍यापक शोध नीति तैयार की गई है:

  • अर्थपूर्ण शोध की संभावना के साथ पूर्णकालीन संकाय सदस्‍यों को आकर्षित और नियुक्‍त करना जिनहें उनके सहयोगियों द्वारा मान्‍यता दी जाएगी।
  • संकाय को कार्यकारी वातावरण, निधियन, परामर्श एवं अन्‍य सहायता प्रदान करनाताकि वे अपने संबंधित क्षेत्रों में शोधकर्ताओं के रूप में अपनी पूर्ण क्षमताओं का उपयोग कर सकें।
  • यह सुनिश्‍चित करना कि आईआईएम उदयपुर द्वारा दी गई सहायता से शोध का प्रभावी एवं व्‍यापक रूप से प्रसार हो।
  • भारत में तथा विदेशों में संस्‍थागत सहयोग एवं संयुक्‍त कार्यक्रमों की स्‍थापना करना।
शोध के लिए सहायता

आईआईएम उदयपुर की शोध नीति में निम्‍न को शामिल करते हुए नीतियों, प्रोत्‍साहन एवं निधियन की व्‍यापक श्रेणी शामिल हैं:

  • 50 प्रतिशत संकाय कार्यभार शोध के लिए आवंटित किया जाता है।.अनुरोध करने पर संकाय सदस्‍य के पास उसकी शोध परियोजना पर कार्य करने के लिए कम शिक्षण कार्य प्राप्‍त करने की संभावना भी मौजूद होती है।
  • संकाय सदस्‍य को प्रति परियोजना 5000 अमेरिकी डॉलर का आरंभिक अनुदान। दो परियोजनाएं प्रति वर्ष स्‍वत: अनुमोदित हो जाती है और संकाय तदंतर परियोजनाओं के लिए अतिरिक्‍त अनुदान का आवेदन कर सकता है।
  • आरएंडडी विवेकाधीन निधि/संकाय विकास निधि- प्रत्‍येक संकाय सदस्‍य को राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलनों तथा अन्‍य शोध संबंधित यात्रा में भाग लेने के लिए 5000 अमेरिकी डॉलर का वार्षिक विकास भत्‍ता दिया जाता है।
  • शोध प्रोत्‍साहन योजना – जर्नलों में प्रकाशनों को अपने क्षेत्र में सर्वोत्‍तम के रूप में मान्‍यता प्राप्‍त जर्नलों में लेखों के लिए 12 लाख रूपए तक का आर्थिक प्रोत्‍साहन दिया जाता है (श्रेणी ए जर्नलों की सूची नीचे देखें).
  • उत्‍कृष्‍ट विद्वानों जिन्‍हें उनके प्रमुखों द्वारा अपने क्षेत्र में आगामी अग्रणी के रूप में माना जाता है, को मान्‍यता देने और पुरस्‍कृत करने के लिए आईआईएमयू शोध चेयर का सृजन। यह शोध चेयर उन संकाय सदस्‍यों के लिए खुली है जो पहले ही आईआईएम उदयपुर में पढ़ा रहे हैं और साथ ही अतिथि संकाय सदस्‍यों के लिए खुली है । यह चेयर प्रतिवर्ष 5000 अमेरिकी डॉलर का निधियन और साथ ही प्रति शैक्षिक वर्ष न्‍यूनतम शैक्षणिक आवश्‍यकता में छूट प्रदान करती है ताकि वे शोध पर अधिक ध्‍यान केंद्रित कर सके।
  • वरिष्‍ठ संकाय सदस्‍य द्वारा युवा संकाय को सक्रिय परामर्श
  • अपने सहयोगियों की परियोजनाओं के शोध विचारों का आदान-प्रदान करने और सूचना प्राप्‍त करने के लिए संकाय सदस्‍यों के लिए बहु मंच। एक पाक्षिक आंतरिक सेमिनार श्रंखला संकाय सदस्‍यों के लिए अपने मसौदा शोध पेपर आंतरिक फीडबैक प्राप्‍त करने हेतु अपने सहयोगियों को प्रस्‍तुत करने का अवसर प्रदान करती है। एक रिसर्च इंकूबेशन सीरीज (आरआईएसई) संकाय सदस्‍यों की बीच नई आरंभ की गई शोध परियोजना को विचारों को साझा करने और संभावित शोध सहयोग के लिए वार्तालाप प्रोत्‍साहित करती है।
  • संस्‍थान संकाय सदस्‍यों को प्रख्‍यात शोध केंद्रित अंतर्राष्‍ट्रीय विश्‍वविद्यालय में एक सेमेस्‍टर व्‍यतीत करने हेतु प्रोत्‍साहित करती है। यह उनकी शोध क्षमताओं में सुधार करने, उनके शोध नेटवर्कों का निर्माण करने और कुछ मामलों में जारी शोध परियोजनाओं के अध्‍ययन में उनके लिए सहायक होगी। ऐसे मामलों में संस्‍थान 70 प्रतिशत लागत वहन करेगा और संकाय सदस्‍य के पास बाकी राशि अपने विवेकाधीन शोध निधि के वार्षिक भत्‍ते का उपयोग करने का विकल्‍प होगा।
  • आईआईएमयू शोध कार्यालय-आईआईएमयूमें एक आरएंडडी प्रबंधक की नियुक्‍ति की गई है जो शोध से संबंधित किसी भी मुद्देपर संकाय एवं कर्मचारियों को समर्थन एवं सहायता प्रदान करने के लिए अंशकालीन रूप से कार्य करता है।
शोध सहयोग

शोध एवं परामर्श के लिए कई संस्‍थागत एवं कारपोरेट सहयोग भी स्‍थापित किए गए हैं:

  • ड्यूक विश्‍वविद्यालय के संफोर्ड स्‍कूल ऑफ पब्‍लिक पॉलिसी के साथ एक संयुक्‍त शोध कार्यक्रम मौजूद है। अब तक चार परियोजनाएं की गईं हैं। पुरूडए विश्‍वविद्यालय के साथ इसी प्रकार का कार्यक्रम स्‍थापित करने के लिए विचार-विमर्श जारी है।
  • एचपीसीएल-आईआईएमयू ने एचआर विश्‍लेषक के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए हैं।
  • जेनपेक्‍ट- आईआईएमयू ने बैंकिंग के क्षेत्र में ज्ञान सृजन प्रदान करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हसताक्षर किए हैं।
  • हिंदुस्‍तान जिंक-आईआईएमयू खनन एवं खनिज प्रबंधन के क्षेत्र में ज्ञान सृजन के लिए एक समझौता ज्ञापन पर विचार-विमर्श करने के उन्‍नत चरण में है।
  • सेवा मंदिर (प्रमुख क्षेत्रीय एनजीओ) आईआईएमयू उनके आजीविका पहल में सलाह और सहायता प्रदान कर रहा है।
  • राजस्‍थान की राज्‍य सरकार के अनुरोध पर आईआईएमयू ने राज्‍य में उच्‍च शिक्षा की गुणवत्‍ता में सुधार करने के लिए नीति का एक प्रस्‍ताव तैयार एवं प्रस्‍तुत किया है।
  • सहारिया परियोजना- राजस्‍थान की सरकार ने इस कार्यक्रम के मूल्‍यांकन हेतु आईआईएमयू को नियुक्‍त किया है जो एक क्षेत्रीय जनजाति को विभिन्‍न प्रकार की सहायता प्रदान करता है।
शोध समितियां

संस्‍थान में शोध वरियता का संवर्धन करने के लिए दो समितियों की स्‍थापना की गई है। आरएंडडी समिति मुख्‍यत: शोध एवं विकास नीति के कार्यान्‍वयन के लिए जिम्‍मेदार है तथा सतत आधार पर इसकी निगरानी करती है। यह उन शैक्षिक क्षेत्रों की पहचान करती है जिनमें शैक्षिक अंतराल है तथा एक सुलभ वातावरण तैयार करती है ताकि शोध की जा सके। ज्ञान अवसंरचना समिति यह सुनिश्‍चित करती है कि संकाय सदस्‍यों की शोध गतिविधियों की सहायता के लिए आवश्‍यक अवसंरचना मौजूद हो जिसमें पुस्‍तकें, जर्नल, ऑनलाइन डाटाबेस और अन्‍य आईटटी सहायता मौजूद है। ये समितियां सभी पूर्णकालीन संकाय सदस्‍यों के एक मंच संकाय परिषद् के दिशा-निर्देश में काम करती हैं।

''ए'' और ''बी'' श्रेणी के जर्नल

आईआईएम उदयपुर का लक्ष्‍य केवल शोध की गुणवत्‍ता में वृद्धि करना ही नहीं है, बल्‍कि इसका प्रभाव भी सुनिश्‍चित करना है। शोध की गुणवत्‍ता प्रत्‍येक क्षेत्र में सहयोगियों द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त होनी चाहिए और शोध को सैद्धांतिक एवं प्रैक्‍टिसनर उन्‍मुखी दोनों के सर्वोच्‍च जर्नलों पर जोर देते हुए प्रमुख समीक्षा जर्नलों में प्रकाशित होना चाहिए। ऐसे थोड़ें ही जर्नल हैं जो व्‍यापार एवं प्रबंधन के क्षेत्र (व्‍यापक रूप से परिभाषित) और अर्थव्‍यवस्‍था तथा अन्‍य संबद्ध क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍टता के उदाहरण के रूप में जाने जाते हैं। उनका उच्‍च दर्जा सुविख्‍यात अंतर्राष्‍ट्रीय जर्नल गुणवत्‍ता सूची में विश्‍व के अग्रणी जर्नलों के रूप में उन्‍हें शामिल किए जाने के रूप में माना जाता है।

इसको ध्‍यान में रखते हुए आईआईएम उदयपुर ने सुविख्‍यात बी स्‍कूलों जैसे कि यूटी डलास और आईआईएम बंग्‍लौर तथा साथ ही एफटी-45 सूची और बिजनेसवीक टॉप-20 सूची द्वारा प्रयुक्‍त रैंकिंग के आधार पर ए और बी के रूप में जर्नलों की सूची तैयार की है।

श्रेणी ए में प्रकाशित सभी जर्नल अत्‍यधिक मूल एवं सर्वोत्‍तम निष्‍पादित शोध का प्रकाशन करते हैं। इन जर्नलों की सामान्‍यत: उच्‍च प्रस्‍तुति एवं अल्‍प स्‍वीकार्यता दर होती है और इनके पेपरों को भारी संख्‍या में संदर्भित किया जाता है। सामान्‍यत: ए श्रेणी में जर्नल अपने क्षेत्रों में अधिकतम प्रभाव दर वाले होते हैं। वर्तमान में ए श्रेणी के जर्नलों की आईआईएमयू सूचीमें 37 जर्नल हैं।

बी श्रेणी के जर्नल मूल एवं सुनिष्‍पादित शोध पेपर प्रकाशित करते हैं और अत्‍यधिक सम्‍मानित माने जाते हैं। इन जर्नलों की वस्‍तुत: अच्‍छी प्रस्‍तुति दर है, वे प्रकाशित की जानी वाली सामग्री के बारे में काफी चुनिंदा होते हैं और उनके पेपर भारी मात्रा में संदर्भित किए जाते हैं उनकी उद्धरण प्रभाव दर क्षेत्र में अन्‍यों से अधिक है। वर्तमान में संस्‍थान ने श्रेणी बी के जर्नलों की सूची में 140 जर्नल हैं।