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पाठ्यचर्या डिजाइन

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पाठ्यचर्या डिजाइन

पहला वर्ष

प्रथम वर्ष छात्रों को प्रबंधन के मूल विषय में गहन जानकारी प्रदान करता है। अनिवार्य मुख्‍य पाठ्यक्रमों में सभी संचालन क्षेत्रों और साथ ही व्‍यापार नीति एवं व्‍यापार आचार जैसे विषयों में प्रयोग किए जाने वाले मुख्‍य उपकरणों, पहलुओं और विश्‍लेषणात्‍मक कौशलों को शामिल करता है। प्रथम वर्ष की अनन्‍य विशिष्‍टता ग्रामीण निमर्जन घटक है जिसे भारतीय सामाजिक और राजनीति वातावरण के संबंध में एक पाठ्यक्रम द्वारा प्रस्‍तुत किया जाता है जिसके पश्‍चात् एक सप्‍ताह का पाठ्यक्रम आयोजित किया जाता है जिसके दौरान छात्रों को स्‍थानीय गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से विभिन्‍न ग्रामीण स्‍थानों में परियोजनाएं करने के लिए पांच- व्‍यक्‍ति टीमों में बांटा जाता है।

पाठ्यक्रम डिजाइन समिति ने मुख्‍य पाठ्यक्रमों में शामिल किए जाने वाले निम्‍नलिखित क्षेत्रों की पहचान की है:

फाउंडेशन: ये पाठ्यक्रम ज्ञान और विश्‍लेषणात्‍मक योग्‍यता तैयार करने पर ध्‍यान केंद्रित करते हैं जो व्‍यापार अध्‍ययन के संचालन क्षेत्रों की समझ को सहायता प्रदान करते हैं।

संचालन: ये पाठ्यक्रम व्‍यापार और प्रबंधन के मूल विषयों को शामिल करते हैं और छात्रों को प्रोन्‍नत पहलुओं को समझने की स्‍थिति से सुसज्‍जित करते हैं।

समेकित: समेकित पाठ्यक्रम छात्र को इस बात के योग्‍य बनाते हैं कि संगठनों की समग्र समझ कैसे विकसित करें और आने वाली समस्‍याओं को सामना केसे करें तथा एक दूसरे से संबंधित विभिन्‍न कार्यों को कैसे देंखे।

कौशल निर्माण: एक प्रबंधन व्‍यवसाय को विभिन्‍न प्रकार के कौशलों को तैयार करने तथा लागू करने और ऐसे बहु-उपकरणों को उपयोग करना आवश्‍यक होता है जो निर्णय निर्धारण और बेहतर प्रबंधन को योग्‍य बनाए। इन कौशलों को अपनाना और इन्‍हें निखारना एक जीवनपर्यंत प्रक्रिया है और कौशलों निर्माण के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम छात्रों को यह यात्रा आरंभ करने योग्‍य बनाते हैं।

परिप्रेक्ष्य: अपनी मौलिक और संचालनात्‍मक जानकारी को समेकित करने की योग्‍यता के अतिरिक्‍त प्रबंधन व्‍यवसायों से बहु-परिदृश्‍य में व्‍यापार को देख पाने की योग्‍यता की भी आशा की जाती है। प्रथम वर्ष में कुछ प्रमुख पाठ्यक्रम छात्रों की अपने व्‍यावसायिक जीवन में इन परिदृश्‍यों को विकसित करने और उनका उपयोग करने में सहायता प्रदान करते हैं।

ग्रीष्‍म इंटर्नशिप

प्रथम वर्ष सफलतापूर्वक पूरा करने पर छात्र विभिन्‍न स्‍थानों पर कंपनियों के साथ दो-माह की कारपोरेट इंटर्नशिप करते हैं। यह इंटर्नशिप उन्‍हें अपनी शिक्षा को व्‍यावहार में लाने तथा परियोजनाओं में काम करने तथा ऐसे कार्य करने का अवसर प्रदान करती है जो वे स्‍नातक होने पर और नियुक्‍त होने पर करेंगे। ग्रीष्‍म इंटर्नशिप पाठ्यचर्या में आईआईएमयू के मिशन के उन्‍मुखीकरण का एक अन्‍य उदाहरण हैं। छात्र इंटर्नशिप में कार्य करते हुए सीखते हैं और कारपोरेट जगत का प्रथम अनुभव प्राप्‍त करते हैं।

ग्रीष्‍म इंटर्नशिप की मूल्‍यांकन प्रक्रिया में कारपोरेट परामर्शदाता मूल्‍यांकन के रूप में कंपनी का फीडबैक शामिल होता है। प्रदर्शन और प्रसार की भी अवधि होती है जिसके पश्‍चात् छात्र प्रथम संकाय को और प्रथम वर्षके छात्रों को इंटर्नशिप का अपनी शिक्षा प्रस्‍तुत करते है।

द्वितीय वर्ष

प्रमुख पाठ्यक्रम पूरा होने के पश्‍चात् उन्‍हें उनकी वैयक्‍तिक रूचि और कॅरियर उद्देश्‍यों के अनुसार उनका पाठ्यक्रम तैयार करने का अवसर प्रदान करता है। उद्यमिता एवं प्रबंध परामर्श जैसे बहु-विषयक कार्यक्रमों के साथ सभी प्रमुख संचालन क्षेत्रों में इलेक्‍टिव विषय प्रदान किए जाते हैं।

एक इलेक्‍टिव विकल्‍प इनोवेटिव इंटरनेशनल बिजनेस इन प्रैक्‍टिस (आईबीपी) है। 5-6 छात्रों की टीम बैंकाक और दुबई जैसे स्‍थानों पर किसी बहु-राष्‍ट्रीय कंपनी के कार्यालयों में दो सप्‍ताह की जीवन परियोजना पूरी करती है।

इलेक्‍टिव विषयों के वृहत विकल्‍प के अतिरिक्‍त छात्रों के पास स्‍वतंत्र अध्‍ययन पाठ्यक्रम (सीआईएस) का विकल्‍प भी उपलब्‍ध है जो उन्‍हें उनकी रूचि के विषय में गहन अध्‍ययन करने की अनमति प्रदान करता है। संकाय पर्यवेक्षण के अंतर्गत सीआईएस सीखे गए उपकरण, तकनीकी, कौशल और दृष्‍टिकोण को फील्‍ड अध्‍ययन, कम्‍प्‍यूटर आधारित विश्‍लेषण और पुस्‍तकालय शोध के माध्‍यम से वास्‍तविक समस्‍याओं के अध्‍ययन में लागू करने का अवसर प्रदान करता है। एक सीआईएस 4 क्रेडिट पाठ्यक्रमों अथवा 30 घण्‍टे के शिक्षण कक्ष अध्‍ययन के बराबर होता है और छात्र अपने द्वितीय वर्ष में 2 सीआईएस कर सकते हैं।

इसके साथ ही दूसरे वर्ष में एक अनिवार्य पाठ्यक्रम कैप्‍सटोन है जो निमर्जन के दर्शन और एप्‍लीकेशन उन्‍मुखीकरण पर जोर देता है। कैप्‍सटोन निर्णय निर्धारण परिदृश्‍य तैयार करने के लिए प्रौदृयोगिकी का उपयोग करता है जिसके भीतर छात्र व्‍यापार वातावरण की अपनी समझ की परीक्षा कर सकते हैं।

कुछ छात्र विदेश में छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम (एसटीईपी) के भाग के रूप में एक सेमेस्‍टर भी व्‍यतीत करते हैं।

शिक्षा शास्‍त्र

अनुदेश की पद्धति अधिकांश के लिए मामला अध्‍ययनों के साथ विभिन्‍न पाठ्यक्रमों के लिए भिन्‍न होती है। इसके अतिरिक्‍त सामूहित एवं व्‍यक्‍तिगत परियोजनाएं, छात्र प्रस्‍तुतीकरण, साइमुलेशन खेलों इत्‍यादि का उपयोग किया जाता है कई पाठ्यक्रमों में उद्योग जगत में अपनाये जाने वाली पद्धति के साथ शिक्षण-कक्ष की शिक्षा को समेकित करने के लिए उद्योग जगत के विशेषज्ञों को बुलाया जाता है।

आईआईएमयू में छात्र शैक्षिक संलिप्‍तता पाठ्यचर्या डिजाइन का एक भाग है जो यह सुनिश्‍चित करती है कि छात्रों को शैक्षिक रूप से तीन चरणों में शामिल किया जाए: कक्षा से पहले, शिक्षण कक्ष के भीतर और कक्षा के पश्‍चात्।

कक्षा से पहले: अधिकांश कक्षाएं प्रत्‍येक कक्षा के लिए सौंपे गए विशिष्‍ट विषय के इर्द-गिर्द विचार-विमर्श पर आधारित होती है। प्रत्‍येक ट्राइनेस्‍टर के आंरभ होने से पहले छात्रों को प्रत्‍येक कक्षा के लिए सामग्री दी जाती है और उनसे कक्षा के पहले यह सारी सामग्री पढ़ने और उनके अध्‍ययन समूहों में प्रारंभिक विचार-विमर्श करने की आशा की जाती है।

कक्षा में: कक्षा में विचार-विमर्श के दौरान यह आशा की जाती है कि छात्र इसमें भाग लेगा और महत्‍वपूर्ण योगदान देगा। संकाय सदस्‍य विचार-विमर्शों में छात्रों के योगदान की निगरानी करते हैं और सभी छात्रों के लिए पाठ्यक्रम के दौरान भाग लेने हेतु समान अवसर प्रदान किया जाना सुनिश्‍चित करते हैं।

आईआईएमयू में पीजीपी के 80% से अधिक छात्रों के पास लगभग दो वर्ष के औसत के साथ एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक का अनुभव है। इन छात्रों को उनके कार्य अनुभव के दृष्‍टिकोण को शिक्षण कक्ष में लाने का अवसर प्राप्‍त होता है। जो विचार-विमर्शों को सघन बनाता है।

कक्षा के पश्‍चात्: कक्षा में विचार-विमर्शों और उसकी बारिकियों में छात्र की योग्‍यता की परीक्षा कई तरीकों से की जाती है:

  • परियोजनाएं: कुछ पाठ्यक्रम यह सुनिश्‍चित करने के लिए मूल्‍यांकन योजना में टीम परियोजना का समेकित करते हैं कि छात्र अपनी शिक्षा को साइमुलेटिव वातावरण में लागू करने का अवसर खोजें।
  • समस्‍या आधारित शिक्षा: मात्रात्‍मक विश्‍लेषण आधारित पाठ्यक्रम में अक्‍सर समस्‍या/हल आधारित दृष्‍टिकोण अपनाया जाता है।
  • साइमुलेशन: कुछ पाठ्यक्रम साइमुलेशन खेलों को उपयोग करते हैं जिनमें निर्णय निर्धारण वातावरण तैयार करने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हैं उदाहरण: कैप्‍सटोन साइमुलेशन।
  • रिफ्लेक्‍शन पेपर: छात्र नियमित रूप से रिफ्लेक्‍शन पेपर लिखते हैं जहां शिक्षा की पहचान और उसे पुन: लागू करने के लिए उन्‍हें अपने स्‍वयं के अनुभव को देखने और महत्‍वपूर्ण रूप से उसे प्रदर्शित करने की आवश्‍यकता होती है।
  • क्‍विज: विशेषकर प्रथम वर्ष में छात्र अक्‍सर घोषित किए गए अथवा औचक क्‍विज का सामना करते हैं जिनमें से कुछ कक्षा में और कुछ अलग से आयोजित किए जा सकते हैं।
  • मिडटर्म और एंडटर्म परीक्षा: ये परिक्षाएं ट्राइमेस्‍टर के प्रत्‍येक आधे भाग में सीखे गए दृष्‍टिकोण को प्रदर्शित करने, संशोधन और पुन: लागू करने की अवधि में सहायक होते हैं।