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संबद्ध एनजीओ

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संबद्ध एनजीओ

संबद्ध एनजीओ

आजीविका ब्‍यूरो घुमुंतु श्रमिकों की आर्थिक और सामाजिक-कानूनी समस्‍याओं का व्‍यापक हल प्रदान करने के लिए अपने कार्य की प्रगति में प्रत्‍यक्ष सेवा डिलिवरी, एडवोकेसी, शोध एवं तकनीकी सहायता को सम्‍मिश्रित करता है। यह फील्‍ड आधारित कार्यकर्ता सहायता और संसाधन केंद्रों के नेटवर्क के माध्‍यम से कार्य करता है। www.aajeevika.org/

एक्‍शन रिसर्च एंड ट्रेनिंग फॉर हेल्‍थ (एआरटीएच) लाभवंचित समुदायों को उनकी आवश्‍यकता एवं क्षमता के अनुसार पहुंच प्राप्‍त करने तथा स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल के प्रबंधन में सहायता प्रदान करने के लिए वर्ष 1997 में स्‍थापित एक निजी, अलाभकारी, शोध एवं प्रशिक्षण संगठन हैं। यह ग्रामीण, जनजातीय एवं असंगठित क्षेत्रों की जनंसख्‍या पर जोर देते हुए महिलाओं, किशोरों और बच्‍चों की स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल में सुधार करनेपर ध्‍यान केंद्रित करता है।http://arth.in/

एफईएस समान भूमि की सुरक्षा में ग्रामीण समुदायों को सहायता प्रदान करने के लए आठ राज्‍यों में 8800 से अधिक ग्रामीण संस्‍थाओं के साथ कार्य करता है। यह प्राकृतिक संसाधनों को पुन: स्‍थापित करने और उनका प्रबंधन करने: समुदाय संस्‍थाओं को मजबूत बनाने, आत्‍मनिर्भरता के लिए उनकी क्षमता में वृद्धि करने और समावेशी प्रक्रिया के संवर्धन करने,: और ऐसी ग्रामीण आजीविका प्राप्‍त करने जो प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हो, के लिए उपायों के साथ पारिस्थितिक पुनर्स्थापना पर ध्‍यान केंद्रित करता है।http://fes.org.in/

गांधी मानव कल्‍याण सोसायटी विशेषकर उदयपुर क्षेत्र में राजस्‍थान के जनजातीय क्षेत्रों के विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके कार्यकलापों को अब दस जिलों- पालि, जोधपुर, टोंक, सवायी, माधोपरु, जालौर, करौली, डुंगरपुर, सिरोही और चित्‍तोड़गढ़ में विस्‍तार किया गया है।http://www.gmks.org

वर्ष1985 में स्‍थापित जागरण जन विकास समिति (जेजेबीएस) मूल रूप से दक्षिणी राजस्‍थान में ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों की गरीब सामाजिक-आर्थिक स्‍थिति में सुधार करने के लिए उदयपुर के भीतर एक स्‍थानीय एनजीओ के रूप में स्‍थापित की गई थी। जेजेवीएस अब गरीबी, बेरोजगारी, गरीबी स्‍वास्‍थ्‍य एवं निरक्षरता के मुद्दों पर कार्य करते हुए समूचे भारत में कार्य करती है।http://www.jagranjan.org/

वर्ष 2001 में इसकी शुरूआत के साथ जतन ने युवाओं, महिलाओं, किशोरो पर विशेष जोर देते हुए राज्‍यों के भीतर वंचित समूहों के सामाजिक एवं भौगोलिय संकेतकों में सुधार करने के लिए कार्य किया है। इसने स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, महिलाओं के विरूद्ध हिंसा, शासन में महिलाओं को सुदृढ़ बनाने, घुमुंतु श्रमिकों और आजिविका से संबंधित कार्यक्रमों पर कार्य किया है। आज जतन के प्रयासों की सभी स्‍तरों पर सरकारी प्राधिकरणों द्वारा समर्थन एवं सहायता दोनों की जाती है।http://www.jatansansthan.org

सेवा मंदिर भारत का एक प्रमुख विकास अलाभकारी संगठन है। वर्तमान में यह दक्षिणी राजस्‍थान के 700 ग्रामों के 360,000 लोगों के साथ कार्य करता है जिसमें 90% से अधिक जनसंख्‍या कृषि पर निर्भर करती है और अधिकांश व्‍यक्‍ति प्रतिदिन 20 रूपए (0.35 अमेरिकी डॉलर) से कम कम कमाते हैं। अभिशासन, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का निरंतर उपयोग, महिला सशक्‍तिकरण, युवा विकास, बाल देखभाल और सामाजिक उद्यम से जुड़े अपने कार्यक्रमों के माध्‍यम से सेवा मंदिर का उद्देश्‍य न केवल सहायता प्रदान करना है बल्‍कि प्रत्‍येक विकास परियोजना को मजबूत समुदायों का निर्माण के मार्ग के रूप में प्रयोग करना है।http://www.sevamandir.org