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नवागंतुक पीजीपी छात्रों को संदेश


आईआईएम उदयपुर के निदेशक प्रोफेसर जनत शाह ने हाल ही में नवागंतुक पीजीपी छात्रों को निम्नलिखित संदेश भेजा। आप इसे नीचे पढ़ सकते हैं।

प्रिय नवागंतुक छात्रों,

कुछ ही सप्ताह में आप आईआईएमयू के सत्र 2020 की कक्षा से अपनी यात्रा शुरू करने के लिए आ रहे हैं। इसलिए यह एक उपयुक्त समय है यह दर्शाने के लिए कि एक संस्थान के रूप में आईआईएमयू आप, हमारे छात्रों से क्या अपेक्षा करता है? आप हमसे क्या उम्मीद करते हैं? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप स्वयं अपने आप से क्या उम्मीद करते हैं?

हम सभी के दिल की एक मूल अपेक्षा है - आईआईएमयू वैश्विक गुणवत्ता वाले प्रबंधन संस्थान के रूप में अपना स्थान लेने की इच्छा रखता है। हम पहले से ही हमारे छात्रों को एक सफल संकाय प्रदान करते हैं जो कक्षा में उच्चतम शैक्षणिक मानकों को प्रस्तुत करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे छात्र समान स्तर की प्रतिबद्धता लाएं एवं पूरी तरह से तैयार व व्यस्त होने से कम कुछ भी तय ना करें। लेकिन यह सिर्फ प्रस्थान का एक बिंदु है, विकास एवं परिवर्तन की नींव है।

परिसर में जीवन के तीन मुख्य स्तंभ हैं - शैक्षिक, संघ एवं समितियों में सम्मिलित होने के माध्यम से आपके द्वारा प्राप्त व्यापक कौशल, एवं अपने कैरियर के लिए तैयारी। इन सभी को हमारे अंतर्निहित उद्देश्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जैसा कि हमारे लक्ष्य में प्रतिपादित है: एक परिवर्तनकारी सीखने का अनुभव प्रदान करना। परिवर्तन एक व्यापक अवधारणा है जो अच्छी तरह से परिभाषित नहीं है; यह केवल एक शब्द मात्र नहीं है बल्कि इससे कईं संबंधित प्रवृतियाँ जुड़ी हुई हैं।एमबीए अनुभव निश्चित रूप से परिवर्तनशील है एवं छात्रों के लिए व्यक्तिगत व व्यावसायिक विकास से परिर्पूण है। दरअसल यहाँ से जाने वाला हर स्नातक एक अलग एवं अधिक सक्षम व्यक्ति के रूप में निखरेगा। परन्तु क्या हम एक उच्च स्तरीय परिवर्तन का लक्ष्य स्थापित कर सकते हैं? अवधारणा को कम असंगत बनाने की कोशिश करने के लिए मैं कुछ तरीके बता रहा हूँ जिनसे हमें आशा है कि छात्रों में आईआईएमयू में उनके सत्र के दौरान बदलाव देखा जा सकेगा।

हमें आशा है कि हमारे स्नातक प्रबंधन को भौतिक सफलता प्राप्त करने के तरीके से अधिक देखेंगे। हम चाहते हैं कि वे प्रबंधन को सम्मानजनक व्यवसाय के रूप में देखें, जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने का एक मार्ग है। हमें आशा है कि हमारे स्नातक प्रत्यक्ष से आगे बढ़ने, सतह के नीचे जाने, विभिन्न दृष्टिकोणों से परियोजनाओं एवं समस्याओं पर विचार करने, धारणाओं पर सवाल उठाने, लगातार अपने विश्व दृष्टिकोण को विस्तारित करने में निपुण होंगे। हम ऐसे स्नातक चाहते हैं जो न केवल कार्यस्थल पर बल्कि पूरी तरह से अपने जीवन के दृष्टिकोण के लिए भी जुनून एवं जिज्ञासा की भावना लाएं। हम ऐसे स्नातक चाहते हैं जिनके पास एक मजबूत नैतिक इरादा हो, न केवल इसलिए कि वे अपने कार्यों के परिणामों के बारे में चिंतित हैं, बल्कि इसलिए कि उनका सहज आत्म-सम्मान कम की उम्मीद नहीं करता।

अंतिम बिंदु खास तौर पर महत्वपूर्ण है वास्तविकता को देखते हुए कि हम ऐसी अपूर्ण दुनिया में रहते हैं जहां भ्रष्टाचार अकसर मानक की तरह लगता है। जहां एक ओर हाल ही में हुआ ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम में धोखाधड़ी घोटाला या पंजाब नेशनल बैंक के साथ नीरव मोदी घोटाला या आईओसी एवं फॉर्मूला वन में धोखाधड़ी, डोपिंग व वित्तीय घोटालों पर विचार करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर इस दुनिया में क्या हमें अपने छात्रों से अपेक्षा करनी चाहिए कि वे चोरी, धोखाधड़ी व समयबद्धता जैसे साधारण विषयों के बारे में परवाह करें? मेरा जवाब एक पूर्ण, चौंकाने वाला एवं अयोग्य "हां" है – ऐसी दुनिया में यह और भी महत्वपूर्ण है कि हमारे एमबीए स्नातक, जो कि राष्ट्र एवं दुनिया के भावी नेता हैं, सभी क्षेत्रों में सुधार के आदर्श व्यक्ति बनें। यदि इस शब्द का कोई वास्तविक अर्थ है तो यह परिवर्तन का हिस्सा होना चाहिए।

मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि जहां आपको आईआईएमयू को मात्र नियुक्ति के लिए एक माध्यम के रूप में नहीं देखना चाहिए, वहीँ हम मानते हैं कि सशक्त नियुक्ति परिणाम आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन वे स्वयं में एक अंत नहीं हैं एवं हम नियुक्ति को आपके शैक्षिक, अतिरिक्त पाठ्यचर्या एवं परिवर्तनकारी यात्रा के केवल एक परिणाम के रूप में देखते हैं।

आईआईएमयू में हमारी चुनौती एवं ज़िम्मेदारी आपके मन को प्रज्वलित करना एवं आपकी सीमाओं का विस्तार करना है। मुझे अब तक के भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रबंधन विद्वानों में से एक सुमंत्रा घोषाल द्वारा सुनाया गया एक उपाख्यान याद आ रहा है। उन्होंने बताया कि इन्सीड के पास फॉन्टेनेब्लौ के वन में, जहां वे काम करते थे, वहाँ की हवा का करारापन व ताज़गी उन्हें दौड़ने और कूदने व फुर्ती से काम करने के लिए उकसाती थी लेकिन इसके विपरीत जब वे अपने परिवार से मिलने घर वापस जाते थे तो कैसे वहाँ की विषम व तपती गर्मी एवं आर्द्रता उनकी सारी ऊर्जा को सोख लेती थी। उन्होंने इन रूपकों का वर्णन यह समझाने के लिए किया कि ऐसी कितनी कंपनियां हैं जिन्होंने गर्मी की ऊष्णता अपने कार्यालयों में पैदा कर रखी है जिसके परिणाम स्वरुप वहां काम करने वाले लोगों का दम घुटता है। घोषाल सवाल पूछते हैं कि कैसे कंपनियों के अंदर फॉन्टेनेब्लौ के वन जैसा माहौल या परिस्थितियाँ बनाई जा सके जिससे लम्बे समय तक कार्य करने का वातावरण बने ना कि उसे छोड़ देने का। कोई भी पूछ सकता है कि हम आईआईएम में ऐसा कार्य कैसे कर सकते हैं एवं यह निश्चित रूप से आईआईएम उदयपुर में हमारा उद्देश्य है।

मुझे उम्मीद है कि आप सभी इन विचारों एवं मेरे द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर विचार करेंगे। हम चाहते हैं कि आप आईआईएमयू द्वारा प्रदान किए जाने वाले अवसरों एवं अनुभवों का सर्वोत्तम उपयोग करें। हम संस्थान में आपको हर तरह से समर्थन देंगे, लेकिन आखिरकार आपकी आईआईएमयू यात्रा का अनुभव आपके स्वयं पर निर्भर करता है। आसमान ही सीमा है एवं हम इस चर्चा को जारी रखने के लिए आने वाले सप्ताहों व महीनों में कईं तरीके ढूंढेंगे।

'यू' में आपका स्वागत है!

जनत शाह